महक चालान नहीं। छतरपुर का बंगला पान पतली बनावट, हल्की मिठास, देर तक ताजगी। विज्ञप्ति पड़ोसी देशों—पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका—की माँग लिखती है। सुगंध इसे सीमा शुल्क पर्चा नहीं बनाती।

जिले: छतरपुर, रीवा, मंदसौर, नरसिंहपुर, टीकमगढ़। कार्य योजना 10 जिलों में 1 करोड़ 3 लाख रुपये: प्रशिक्षण, तकनीक, रोपाई सामग्री, बरोज। रीवा महसांव के दो गाँवों का पान वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ जाता है।

बरोज श्रम है

चौरसिया समाज पीढ़ियों से बरोज में तापमान और नमी बाँधता है। पान मसाला-गुटखा की माँग पारंपरिक पत्ती को छूती है—विज्ञप्ति स्वयं लिखती है। सांस्कृतिक-धार्मिक उपयोग स्थिर माँग बताई गई। चित्र पान विज्ञप्ति का फ्रेम है।

मुख्य बातें

  • बंगला पान: पतली पत्ती; 10 जिला योजना 1.03 करोड़।
  • चौरसिया समाज की परंपरा; बरोज में तापमान-नमी।
  • पड़ोसी देश माँग विज्ञप्ति है; चालान इस फाइल में नहीं।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्य प्रदेश जनसंपर्क · प्रदेश के “बंगला पान” की महक पड़ोसी देशों तक ↗29 मई 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।

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